पिछले विडिओ में हमने देखा । २००८ में अमेरिका में आए आर्थिक संकट के क्या कारण थे । और पूरे विश्व की बैंकिंग प्रणाली कैसेख़तरे में आ गईं थी । इस विडिओ में हम जानेंगे की अमेरिका ने कौन से क़दम उठाए ।
जैसे लोगों ने क़र्ज़ की किश्तें भरना बंद कर दिया, वह होम लोन डिफ़ॉल्ट होने लगें, वैसे सिडीओ बॉण्ड फेल होने लगे । बैंक, फ़ाइनेंशियइन्स्टिट्यूट और इन्श्योरेंस कंपनियाँ सब ख़तरे में आ गयी थी । उसकी शुरुआत हुई मार्च २००८ को । अमेरिका की ५वी सबसे बड़ीइन्वेस्टमेंट बैंक बिअर स्टर्न्स दिवालिया बनने जा रही थीं । जे पी मॉर्गन कंपनीने यह कंपनी ख़रीद ली । सरकारने ३० बिलियन डॉलर केबैड क़र्ज़ों के लिए गारंटी दी ।
अमेरिका के लगभग आधे मॉर्गेज, लगभग ५ ट्रिलियन डॉलर्स के मॉर्गेजेस मॉर्गेज जाइंट फैनी मे और फ्रेडी मैक कंपनीने इंश्योर किये थे ।रियल इस्टेट मार्केट प्रॉब्लम से दोनों कंपनियाँ तकलीफ़ में आ गयी । दोनों कंपनियाँ गवर्नमेंट स्पॉन्सर्ड हैं, दोनों को गवर्नमेण्ट की गारंटीहैं ऐसा सब मानते थे । अमेरिकन सरकार ने फैनी और फ्रेडी कंपनियाँ अपने नियंत्रण में ले ली । कंपनियों के सिइओ बदल दिए गए ।हाउसिंग मार्केट स्थिर करने के लिए, फ़ाइनेंशियल इन्स्टिट्यूशन्स के फ़ायदे के लिए वह ज़रूरी था । लगभग १८७ बिलियन डॉलर्स केबेलआउट से दोनों को बचाया गया । वॉल मार्केट लगातार गिरता गया । जनता बेल आउट के विरोध में प्रदर्शन कर रही थीं । उसी वक़्तअमेरिकन राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे थे । दबाव बढ़ रहा था ।
अगला नंबर लीमन ब्रदर्स का था । लीमन ब्रदर्स तब अमेरिका की चौथी सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट बैंक थीं । लीमन ब्रदर्स के सिइओ डीकफ़ूल्ड को पहले से ही सावधान कर दिया गया था । कंपनी को संकट से बाहर निकालने के लिए, उन्हें इन्वेस्टमेंट जुटाने के लिए बतायागया था । मगर फूल्ड सोच रहे थे कि उनकी कंपनी स्ट्रोंग हैं । उन्हें लगता था की रियल इस्टेट मार्केट फिरसे ऊपर आ जाएगा और यहएक टेम्पररी प्रॉब्लम है । लीमन ब्रदर्स के शेयर्स दिनोंदिन गिरते गए ।
मेरिल लिंच कंपनी भी तकलीफ़ में आ गयी थी । आर्थिक संकट तेज़ी से बढ़ रहा था । फ़ेड चेअरमन बेन बर्नान्की ट्रेजरी सेक्रेटरी हैंकपॉल्सन ने सब बड़े बैंक, फायनेंशियल इन्स्टिट्यूट्स से मिटींग शुरू कर दिए । उन्हें इस असाधारण संकट के बारे में बताया गया । मेरिललिंच कंपनी को बैंक ऑफ अमेरिका ने ख़रीद लिया ।
लीमन ब्रदर्स को ब्रिटिश कंपनी बार्कलीज ख़रीदने वाली थी । मगर ब्रिटिश सरकार अमेरिका का आर्थिक संकट अपने देश में लाना नहींचाहतीं थीं । लीमन का बार्कलीज कंपनी के साथ व्यवहार हो न सका । दूसरे ही दिन लीमन ब्रदर्स बैंकरप्ट हो गई ।
एआयजी इन्श्योरेंस कंपनी भी संकट में थी । ८१ मिलियन लाइफ़ इंश्योरेंस, टिचर्स पेंशन सब जगह एआयजी कंपनी थी । इसी लिएअमेरिका सरकार ने एआयजी कंपनी को “टू बिग टू फेल” बताया । सरकार ने कंपनी को बेल आउट कर दिया । सिडिएस इंश्योरेंस केपैसे देने के लिए सरकार ने एआयजी के ८० प्रतिशत शेयर ख़रीद लिए । सरकार ने अपना नया सीईओ नियुक्त कर दिया । लगभग १८२बिलियन डॉलर्स का यह बेल आउट था ।
फ़ेडरल रिज़र्व ने अपने इंट्रेंस रेट कम करना शुरू कर दिया । इंट्रेंस रेट ० से ०.२५ परसेंट तक पहुँच गया । बैंक, कंपनियों को बहुत हीकम रेट पर बिलियन डॉलर्स मिलने लगे । कम रेट से मिल रहे ये पैसे बिज़नेस और आम आदमी तक पहुँच जाए यह इसके पीछे की सोचथीं । नवंबर २०११ तक होम लोन के रेट ३.९८ परसेंट तक नीचे आ गए । जिसके कारण रियल इस्टेट मार्केट ज़िंदा रह सका ।
ट्रबल्ड असेट, मॉर्गेज जो प्रोब्लम में थे; उन्हें सरकार ने ख़रीदने का फ़ैसला लिया । जिसे ट्रबल्ड असेट रिलीफ़ प्रोग्राम (टार्प TARP) कहागया । ७०० बिलियन डॉलर्स वॉल स्ट्रीट के बेलआउट के लिए माँगे गये । २९ सितंबर २००८ को बेल आउट बिल फेल हो गया । जिनबैंकों ने, जिन फायनेंशियल इन्स्टिट्यूट्स ने ग़लत चीज़ें की; उन्हें टैक्स पेयर के पैसे देकर क्यों बचाया जाए; यह सवाल था ।
स्टॉक मार्केट में बड़ी गिरावट आ गई । फिर से जागतिक मन्दी का डर फैला हुआ था । १ अक्तूबर २००८ को बेल आउट बिल पास होगया । वाकोविया और वाशिंगटन म्यूचुअल फेल हो गए । एक हफ़्ते में १८०० पॉइंट १८% से शेयर बाज़ार गिर गया ।
सरकार को कुछ ऐसा उपाय चाहिए था जो ज़्यादा ताकतवर और तेज़ी से काम करने वाला हो । तभी वॉरन बफे ने एक सुझाव दिया ।उन्होंने सुझाया कि ट्रबल्ड असेट ख़रीदने के बजाय, अगर पैसा डायरेक्ट बैंकों को दिया जाए तो ज़्यादा बेहतर होगा ।
इस तरह से, १३ अक्तूबर २००८ को सब बड़े बैंकों के मुख्य अधिकारीयों के साथ सरकार ने मीटिंग की । जिसमें टार्प के तहत, बैंकों कोप्रिफर्ड शेयरों के बदले बिलियन डॉलर्स दिए गए । मॉर्गन स्टैनली १० बिलियन, सिटी ग्रुप २५ बिलियन, गोल्डमन सैच १० बिलियन, जे पीमॉर्गन २५ बिलियन, बैंक ऑफ अमेरिका १५ बिलियन , वेल्स फार्गो २५ बिलियन इस तरह से सरकार ने बैंकों को कैपिटल दिया । टार्पफंड में लगभग २४५ बिलियन डॉलर्स के बैंकों के प्रिफर्ड शेयर ख़रीद लिए गए । जिससे बैंकों के पास लिक्विडीटी आ गयी । लगभग ८०बिलियन ऑटो कंपनियों के बेल आउट के लिए दिए गए । ६७ बिलियन एआयजी बेल आउट और १९ बिलियन क्रेडिट मार्केट के लिएइस्तेमाल किए गए । लगभग ३० बिलियन डॉलर्स लोन मॉर्गेज (The Homeowner Affordability and Stability Plan) मदद केलिए दिए गए । १७ फ़रवरी २००९ को दी अमेरिकन रिकवरी ऐंड रिइन्वेस्टमेंट एक्ट के तहत टैक्स कटौती, स्टिम्यूलेशन और सार्वजनिककामों के लिए खर्च किए गए ।
क्वांटिटेटिव इजिंग । फ़ेडरल रिज़र्व ने बैंकों से क़र्ज़ ख़रीदना शुरू कर दिया । नवंबर २००८ में फ़ेड ने ५०० बिलियन डॉलर्स के मॉर्गेजबैक्ड सिक्योरिटीज़ और १०० बिलियन डॉलर्स के दूसरे क़र्ज़ ख़रीदना शुरू कर दिया । फ़ेड ने मॉर्गेज बैक्ड सिक्योरिटीज़, बॉण्ड, कन्झूमर लोन ख़रीदना शुरू कर दिया । हाउसिंग मार्केट को इससे मदद मिलीं । जून २०१० तक फ़ेड ने तक़रीबन २.१ ट्रिलियन डॉलर्स केसिक्योरिटीज़ ख़रीद लिए थे ।
इन सब उपायों के कारण आर्थिक संकट दूर कर दिया गया । कुछ सालों में एआयजी कंपनी स्टेबल हो गई । २०१२ साल एआयजीकंपनी के शेयर सरकार ने जब बेंच दिए, तो सरकार को २२ बिलियन डॉलर्स का प्रोफ़िट हो गया ।
माँग से ज़्यादा घरों की बिक्री, किसी भी तरह नयें लोन बेचने की बैंकों की स्पर्धा, सब बुरी चीज़ें नज़रअंदाज़ करके दिए गए सबप्राइमलोन, नियम तोड़ मरोड़कर फायनैंशियल इन्स्टिट्यूट, इंश्योरेंस कंपनियों ने कमाये प्रोफ़िट और रेटिंग एजेंसीज ने दिए हुए ग़लत रेटिंग्स ।यह सब २००८ आर्थिक संकट के महत्वपूर्ण कारण थे । आज ग्लोबलाइज़ेशन का दौर हैं । ग्लोबल फायनैंशियल इंस्टीट्यूट्स पूरेविश्वभर बिलियन डॉलर्स के इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं । २००८ का आर्थिक संकट हम सब के लिए एक बड़ा उदाहरण है ।
प्रमोद वाघमारे
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