कालेज के बाद जब मैंने नया जॉब जॉईन किया; तब मेरे जो बॉस थे उन्होंने मुझे दो बातें समझाई थी । बहुत ही आसान बातें थी । परमुझे वो हमेशा काम आयीं ।
नया जॉब था । तब मैं और मेरे दोस्त सब नयें थे । मेरे बॉस बहुत ही स्ट्रिक्ट थे । कभी कोई गलती करें तो बहुत ग़ुस्सा करते थे । हम सबउनसे डरते थे । जैसे समय बीतता गया वह डर कुछ कम हुआ ।
एक बार लंच टाईम में हम हमेशा की तरह एकसाथ खाना खाने बैठे थे । तब उन्होंने बताया,” ये हमेशा याद रखना, कभी भी किसी कीगलती हो, तब उस व्यक्ति के साथ सिर्फ़ उस गलती के बारे में ही बात करें । उसे ये मत कहो की तुम हमेशा ऐसे ही करते हो, तुम्हारी येबात मुझे पसंद नहीं, तुम्हारी वो आदत ग़लत है । सिर्फ़ और सिर्फ़ उस गलती के बारे में बात करो ।“ गुस्से में हम क्या कुछ नहीं कहते? ऐसी भी बातें बोलते हैं जिसका उस गलती से कुछ संबंध नहीं ।
दूसरी चीज़ मैंने देखी थी, वह कितनी बार भी किसी पर गुस्सा करते थे मगर उन्होनें कभी किसी की रिपोर्ट ख़राब नहीं लिखीं । उस बारे मेंमैंने उनसे एक बार पूछा ।
वो बोले,” देखो, तुम किसी से गुस्से में बात करो, गलती से कुछ ग़लत बात करो; वह कुछ दिनों बाद भूल जाएगा । मगर तुम जब काग़ज़पर किसी का नुक़सान करते हो, तो वह तुम कभी बदल नहीं सकते । तुमने काग़ज़ पर किया नुक़सान उस व्यक्ति को हमेशा तकलीफ़देता रहता हैं ।”
आज वह रिटायरमेण्ट का आरामदायक जीवन जी रहे हैं । आज भी उनसे मिलने जाता हूँ तब उन्होंने सिखायी यह बातें याद आ जाती हैं ।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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