Thursday, May 7, 2020

वरदान (हिंदी)

आज फिर लेट हो गया  कंपनी कँपस में पार्किंग के तरफ़ जा रहा था  एक कॉर्नर में मेरे कंपनी के कुछ लोग कोरोना वायरस मदद केलिए कुछ काम कर रहे थे  मैं उन्हें मिला और थोड़ी मदद कर दी 

मेरी बाईक के पास मैं गया  वहाँ एक आदमी खड़ा था  मुझे देखकर मुझसे बोला, “बहुत अच्छे  तुम हमेशा लोगों की सहायता करतेहो 

मैं बोला,” थोड़ी बहुत करते रहता हूँ 

वाह बेटे  मैं तुमसे बहुत खुश हूँ  बताओ मैं तुम्हें क्या वरदान दूँ ” वह व्यक्ती बोला 

अच्छी टी शर्ट जीन्स पहने उस व्यक्ति को मैंने फिर से देखा  “मुझे मज़ाक़ करने का कोई मुड़ नहीं ” कहकर मैंने बाईक को चाबीलगाईं 

मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा  मैं ईश्वर हूँ ” कहकर वह मुझे मेरे बारे में एक एक बातें बताने लगा  उसे मेरे जीवन की वह बातें भी पता थीजो सिर्फ़ मुझे ही पता थी  वह फिर बोला,”बोल बेटा 

मैं अब पूरी तरह से कन्फ्यूज हो गया था  यह सचमुच भगवान हैंया नहींनहीं होंगे  मगर सचमुच भगवान हों तो?

अपने आप को सँभालते हुए मैं बोला,” मैं मामूली इन्सान हूँ  अभी कुछ सोच नहीं सकता  क्या मैं यह वरदान कल माँग लूँ ?” 

मेरी बात पर वह हल्के से मुस्कुराए और बोले,” ठीक हैं  कल इसी वक्त यहीं मिलते हैं 

मैं घर पहुँचा और अपनी पत्नी को सारी बात बताई  वह बोली,” पता नहीं वह ईश्वर हैं या नहीं  पर माँगने में क्या हर्ज हैं  तुम उन्हेंअपनी प्रमोशन का वरदान माँगों  या फिर बच्चों की पढ़ाई के लिए वरदान माँगों 

मैं बोला,” मगर अच्छी सेहत भी ज़रूरी हैं  और ख़ुशी भी ज़रूरी हैं 

अगले कुछ घंटे जीवन में क्या ज़रूरी हैं और क्या वरदान माँगना चाहिए यह सोचते सोचते मैं और भी ज़्यादा भ्रमित हो गया  

दूसरे दिन ऑफ़िस में वहीं सोच रहा था  हम सामान्य लोगों को कितना कुछ चाहिए होता हैं  सिर्फ़ एक वरदान से क्या होगा?

मैं दस मिनिट पहलें ही उसी जगह जाकर रूक गया  वह व्यक्ति वहाँ नहीं था। मैं सोचने लगा  यह सचमुच हो रहा हैंवह सचमुचईश्वर होंगेमैं रूक जाऊँ या चला जाऊँ?

तो क्या सोचा बेटे?” आवाज़ सुनकर मैंने पीछे मूँड़कर देखा,” बताओ क्या वरदान दूँ?”

मैं पसीने से पूरी तरह से भीग गया था  क्या माँगूँये माँगूँ या वह

बोलो बेटा ” उन्होंने फिर से पुछा  यह सुनकर मैंने अपने हाथ जोड़ लिए 

और बस इतना बोल सका,” हे ईश्वरमैं आपसे क्या माँगूँबस आप हमेशा मुझे आपका प्रेम देते रहे 

मंद मुस्कुराते ईश्वर बोले,” जैसे तुम्हारी इच्छा।” 

मैंने सर झुकाया  जब मैंने ऊपर देखा तब वह मेरे सामने नहीं थे 


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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare

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