“मुझे नहीं लगता मेरी उसके साथ बन पायेगी ।” मेरा भतीजा मुझे बता रहा था ।
“क्या हुआ अब? तुम्हारी शादी को ६ महीने भी नहीं हुए ।” मैं बोला ।
“बहुत चिड़चिड़ी हो गयी हैं वो । मुझे उल्टा जवाब देती हैं । घर में ध्यान नहीं दे रही ।”
“आपको क्या कारण लगता हैं ।” मेरी पत्नी उसे चाय का कप देते हुए बोली ।
“पता नहीं । समझ नहीं आ रहा ।” भतीजा ।
मैं “ तो भाई बस एक काम करो । जब तुम दोनों फ़्री रहोगे, तब उसके पास शांति से बैठकर उसकी बातें शिकायतें सुनो । बस एक हीकंडीशन है; बातें पुरी ईमानदारी से सुन लेनीं है और वो भी उसे बिना टोकें ।”
“बस? उससे क्या होगा?” भतीजे ने पुछा ।
“ट्राय तो कर लीजिए ।” मेरी पत्नी बोलीं ।
“और हाँ, इस शनिवार हमारी शादी की इक्कीसवी सालगिरह है । दोनों ज़रूर आना ।” मैंने बताया ।
शनिवार को दोनों आये तब बहुत खुश दिख रहें थे । मैंने भतीजे को पुछा,” क्यों सब ठीक है? बातें हुई?”
“बिलकुल । एक घंटा वो बातें कर रहीं थीं । मेरी अच्छी बुरी बातें, मेरी शिकायतें ।” भतीजा बोला ।
“फिर?”
“फिर? मैं अपने आप को अलग नज़रिये से देखने लगा ।” हँसते हुए वो बोला ।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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