एक जातक कथा है।
एक मदारी था । उसके पास एक बंदर था और एक साँप ।
गाँव गाँव जाकर वो खेल दिखाता । जब भी बंदर कुछ गलती करता, मदारी उसे डंडे से पिटता था ।
एक बार दोपहर में खेल दिखाने के बाद खाना खा कर मदारी एक पेड़ के छाँव में सो गया। गलती से वो बंदर को बाँधना भूल गया । ये देख बंदर ऊपर पेड़ पर चढ़ गया ।
मदारी ने जैसे ही बंदर को पेड़ पर देखा, वो बहुत ही प्यार से मधुर वाणी में बंदर को बोला,” बंदर बेटे, तुम वहाँ क्यों गए ? मेरा कोई बेटानहीं । तू तो मेरे बेटे जैसा ही है । मेरे बाद मेरा सब कुछ तेरा ही होगा । तू वापस मेरे पास आ ।”
मदारी की मीठी वाणी सुनकर बंदर बोला,” मदारी, तुम मुझे मीठे बोल बोल रहे हो । मगर मैं तुम्हारे डंडे की मार भुला नहीं । तुम्हारीसंपत्ति से ज्यादा मुझे इस वन में ख़ुशी से घूमना ज़्यादा पसंद है ।” यह कहकर वो वन में ग़ायब हो गया ।
ये पंचतंत्र, हितोपदेश, जातक कथाएँ सिर्फ़ छोटे बच्चों के लिए ही होते है क्या ?
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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