आज मैंने फ़ैसला किया । आज दिनभर मैं कोई शिकायत नहीं करूँगा ।
काम करते हुए पसीना पोंछते पत्नी बोली,” आज स्कूल बस नहीं आयेगी । जाते हुए बच्चों को स्कूल ड्रॉप किजीए और घर ख़र्च के लिएकुछ पैसे दिजीए ।”
मैंने उसे देखा । वो भी घर के सब काम निपट कर ऑफ़िस जानें की जल्दी में थीं । महंगाई भी बढ़ गई हैं । मैं कुछ न बोला । उसे मैंने कुछपैसे दे दिए ।
ट्रैफ़िक में बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद मैं ऑफ़िस लेट पहुँचा। बॉस की कड़वी बातें सुनकर अपने चेअर पर बैठा ही था की पता चलाकी आज वापस सरकारी ऑफ़िस जाना पड़ेगा ।
बिना शिकायत मैं सरकारी कार्यालय पोहोंच गया । अब सरकारी ऑफ़िस कितने साफ़-सुथरे होते हैं । और सब ऑनलाइन हो गया हैं ।क्या बात हैं ।
आधे घंटे बाद क्लर्क की मुलाक़ात हो गयी । मैं तीन चार बार वहाँ पहले भी आया था । हमने ऑनलाइन सब कुछ सबमिट किया था ।पर उनकी कुछ क्वेरी थीं । उन्होंने बड़े अफ़सर को मिलने के लिए बताया ।
बड़े अफ़सर मीटिंग में थे । दो घंटे बिना शिकायत इंतज़ार करने के बाद उनकी मुलाक़ात हो गयी। उन्होंने बताया की काम हो जायेगाऔर दो दिन बाद वापस बुलाया । बिना शिकायत मैं ऑफिस वापस आ गया ।
दिनभर का काम ख़त्म करतें करतें लंच भी न कर सका । बीच में बँक से फ़ोन आया । होम लोन की ईएमआई बढ़ गई थी । बच्चों कोस्कूल से पिकअप कर के घर पोहोंच गया | पत्नी भी थकीं हारीं ऑफ़िस से वापस आ चुकी थीं ।
बच्चों और पत्नी से बातें करते हुए सोच रहा था की बिना शिकायत आज का दिन कितना अच्छा गया । सोचते सोचते कब आँख लगगयी पता ही नहीं चला ।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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