सच क्या होता हैं? आप जो जानते हैं; आप जो सोचते ; आपको जो दिखाया गया है क्या वहीं सच होता हैं?
कभी एक कहानी पढ़ीं थी । सच और अपना दृष्टिकोण perspective कैसे होता है यह बहुत ही सरलता से सिखानेवाली यह कहानी ।
एक हाथी और पाँच अंधों की । एक बार पाँच अंधे हाथी देखने गये ।
एक ने हाथी की सूँड़ को हाथ लगाया । उसे लगा के हाथी सूँड़ जैसा होता हैं । दूसरे ने हाथी के पाँव को हाथ लगाया तो उसे लगा हाथीपाँव जैसा होता हैं । तीसरे ने कान को हाथ लगाया, चौथें ने दांतों को और पाँचवें ने पूँछ को हाथ लगाया ।
थोड़ी देर बाद किसी ने उनसे पूँछ लिया की हाथी कैसा था; तो हर अंधा उसने जैसे हाथी को महसूस किया वहीं बताने लगा और थोड़ी देरबाद पाँचों आपस में लड़ने लगे की हमें पता हैं की हाथी कैसा होता हैं ।
वह सब अपनी जगह सही थे, क्योंकि उन्होंने जो महसूस किया वहीं उनके लिए सच था ।
सच भी हाथी के जैसा ही होता हैं । विशाल । हमारी आँखों पर पट्टियाँ होती हैं । कभी प्रेम की, कभी दोस्ती की, कभी छल कपट की, कभी लालच की, कभी धारणाओं की मान्यताओं की । कभी किसी ने आपके आँखों पर पट्टियाँ बाँधीं हुईं होती हैं ।
इन पट्टियों के कारण हम एक छोटे से अंग को ही पूरा सच सत्य मानते हैं । जबकि सच बहुत बड़ा होता हैं ।
और पूरा सच जानने के लिए हमें वह पट्टियाँ खोलनी ज़रूरी हैं; जो हमें पूरा सच जानने में बाधा उत्पन्न करती हैं । तभी तो हमारादृष्टिकोण बदलेगा । तभी तो हम देख सकेंगे पूरा सच ।
आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें 🙏🙏🙏
प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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