Saturday, October 17, 2020

मुझे ख़ुद पर विश्वास है (हिंदी)

जहां तक नज़र जा रही हैसिर्फ़ रेगिस्तान नज़र  रहाँ हैं...


ना कोई प्राणीना पक्षीना पानीना कोई हलचल...


सिर्फ़ रेगिस्तान...


बहुत प्यास लगी है... सिर पर तपता सूरज और नीचे गर्म रेत...


कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहाँ... चक्कर आने लगा हैं...


मुझे फिरसे बारिश में भीगना हैं...


फिरसे गोवा के समंदर में दोस्तोंके साथ डुबकियाँ लगानी हैं...


फिरसे पत्नी बेटे के साथ कार्बेट के जंगल में खुलीं जीप में घुमना हैं...


रात रात भर गप्पें लड़ाने हैं...


चौपाटी पर गोलगप्पे खाने हैं...


घने जंगल में ख़ूब चलना हैं...


पेड़ के छाँव में लेटकर कोई अच्छी सी किताब पढ़नी हैं...


पर्वत पर खड़े होकर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना हैं...


वह ताज़ा हवा सीने में भरनी हैं...


हाँमैं यह करनेवाला हूँ... मुझे ख़ुद पर विश्वास है...


आगे रोशनी दिख रहीं हैं... पानी नज़र  रहाँ हैं... 

कुछ उँटकुछ आदमी दिख रहे हैं मुझे...



आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें 🙏🙏🙏


प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare


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(C) Pramod Waghmare

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