एग्रो टूरिज़म के लिए आये सब लोगों को वो किसान बहुत ही आनंद के साथ देख रहा था । अब न कोई खेती करता है न कोई गाँव जाताहै । शहर के नौजवान, फ़ैमिली और बच्चे जिन्हें गाँव खेतीबाड़ी पता नहीं, वो गाँव में रहने का एक छोटा सा अनुभव ले रहे थे । उसकिसान ने अपने गाँववालों को लेकर कुछेक साल पहले ये एग्रो टूरिज़म शुरू किया था ।
“क्यों लाये हो तुम मुझे यहाँ ?” उस युवती की आवाज़ सुनके किसान का ध्यान उन दोनों पर गया । दोनों लगभग २५ के रहेंगे ।
युवक बोला,” कम्मॉन, हम यहाँ वीकेंड पिकनिक मनाने आये है ।”
युवती, “तुम कहाँ पिकनिक मना रहे हो । तुम्हारा ध्यान तो तुम्हारी मोबाईल पर ही है ।”
युवक,” मेरा काम है, मुझे काम के फ़ोन आ रहे है ।”
युवती,” तुम छुट्टी पर हो । मैं भी छुट्टी पर हूँ । तुम हमेशा ऐसे ही करतें हो । क्या मेरे लिए तुम थोड़ा भी वक्त नहीं दे सकते ?” ऐसेबोलकर वह ग़ुस्से में चलीं गयी ।
“बेटा, ज़रा मेरे पास आओगे?” सुनकर युवक ने उस बूढ़े किसान के तरफ़ देखा ।
“बोलिए ।”
“माफ़ करना बेटा, तुम्हें पुँछ रहा हूँ । क्या तुम सचमुच उस लड़की से प्यार करते हो?”
“हाँ, बहुत ।”
“बेटा, वो वहाँ एक पौधा दिखाई दे रहा है तुम्हें ।” एक कोने में एक पौधे को दिखाते वह बोला ।
“वह सूखा पौधा ?”
“हाँ बेटा, वहीं सूखा हुआ पौधा । उसपे बहुत ही आकर्षक और सुगंधी फ़ुल खिलते थे । कितने घंटे मैं यहाँ आरामसे आनंद के साथ बैठाकरता था । मुझे लगता था की ये पौधा हमेशा मुझे ऐसे ही आनंद देता रहेगा ।”
“तो ?” युवक ।
“इन पौधों को पानी देना पड़ता हैं । खाद देना पड़ता हैं । कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता हैं और बहुत सारा प्यार देना होता हैं ।बस, मैंने ध्यान नहीं दिया और वो मर गया । अब मैं कितना भी पानी डालूँ, खाद डालूँ, वो कभी ज़िंदा न हो पायेगा । बेटे, बस इतना ही।”
“मैं समझ गया । आपका आभारी हूँ ।” बोलकर उसने अपना मोबाईल स्विचऑफ किया और वह अपने प्रेमिका की तरफ़ जाने लगा ।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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