“सुबह से कॉल कर रहाँ हूँ तुम्हें । तुम्हारा मोबाइल बंद था । इसलिये यहाँ आ गया ।” मेरा दोस्त मेरी तरफ़ आँतें हुए बोला ।
“आरामसे बैठ पहले ।” उसके चेहरे पे पसीना देख मैंने पानी का गिलास उसके सामने रखा और बोली,” कॉन्फ़्रेंस के लिए गईं थीं ।सुबहफ्लाईट में थीं। एअरपोर्ट से सीधे ऑफ़िस आ गयी । बताओ । एनी प्रॉब्लम? “
“तुम्हें तकलीफ़ नहीं देना चाहता था । पर एक कंपनी में मेरा पेमेंट फँस गया है । और दूसरी कंपनी की आर्डर भी पूरी करनी हैं ।”
“ओके । तो? “
“अभी मुझे पाँच लाख रुपये की सख़्त ज़रूरत हैं । मैं एक महीने में तुम्हें वापस कर दूँगा । प्लीज़ ।”
मैंने मेरा अकाउंट चेक कर के उसे दो चेक दिए,” अभी तो मेरे अकाउंट में तीन लाख हैं और मेरे एफ़डी के दो लाख कल आ जायेंगे।उसका कल की तारीख़ का ये दूसरा चेक ।” दोनों चेक मैंने उसे दे दिये ।
वह चेक लेकर जैसे ही गया, मेरे ऑफ़िस की दोस्त मुझे बोली,” तुमने ऐसे ही कैसे पैसे दे दिए उसे? तुम्हें पता हैं न वो लोग कैसे होते है? वो लोग कब तुम्हें धोका देंगे तुम्हें पता भी नहीं चलेगा ।”
“कौन है वो लोग? ये मेरा कॉलेज के टाईम से दोस्त हैं । इतना मेहनती और ईमानदार इन्सान मैंने कभी नहीं देखा । जब मेरे अपने मेरेसाथ नहीं थे, तब भी ये हमेशा मेरे साथ था । वो लोग कैसे होते हैं मुझे नहीं पता, पर मेरे दोस्त पे मेरा पूरा विश्वास है ।”
बीस दिन बाद ही मेरा दोस्त जब पाँच लाख का चेक वापस देने आया, तब मेरे ऑफ़िस की वो दोस्त कुछ बहाना करके वहाँ से बाहर गईं।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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