अब रात के क्यारह बजने वाले थे । ऑफ़िस में सभी अभी तक काम कर रहें थे । कल कंपनी के इंटरनैशनल क्लायंट के हेड आने वालेथे । कल की मिटींग कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण थी । इस लिए मैं ख़ुद ऑफ़िस में रूका था । पिछले तीन साल मैंने पुरा ध्यान काममें लगाया था ।
उसी समय मुझे फ़ोन आया । मेरी एक ऑफ़िस वर्कर अभी भी काम कर रही थी । वह प्रेगनेंट थी । कल के मीटिंग के कारण वह छुट्टीछोड़कर आज आयी थीं । उसे अचानक लेबर पेन शुरू हुआ था ।
बाहर शहर में अशांति थी । अँम्ब्युलंस भी कितने देर से आ नहीं रही थीं । इतनी इम्पोर्टंट मिटींग थी कल । मैं झट से उठा । एक महिलाऔर एक पुरूष कर्मचारी को साथ ले के हमने उसे मेरे कार में बिठाया और मैं कार चलाते अस्पताल के तरफ़ निकला ।
पुलिस नाकाबंदी थी जगह जगह । वह पार करतें करतें हम अस्पताल पोहोंचे । तब तक ऑफिस से उसके पति को फ़ोन करने के कारणवह पहलें से ही वहाँ मौजूद थे । डाक्टर इमर्जंन्सी में उसे अंदर ले गये ।
मेरे नज़र के सामने आज भी वह दृश्य घूम रहे थे । तीन साल पहले ऑफ़िस में ऐसे ही मैं काम कर रहा था । कुछ महत्वपूर्ण प्रेझेंटेशन था। इसी तरह शहर में अशांति थी । मेरी पत्नी मुझे लगातार फ़ोन करती रहीं । मैं आ रहा हूँ कहता रहा । काम ख़त्म करके जब मैंअस्पताल पहुँचा, न मेरा बच्चा था और न ही मेरी पत्नी ।
आज कितनें सालों बाद मैं मेरी साँसें महसूस कर रहा था ।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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