Wednesday, July 29, 2020

गलती, गुस्सा, नुक़सान (हिंदी)

कालेज के बाद जब मैंने नया जॉब जॉईन कियातब मेरे जो बॉस थे उन्होंने मुझे दो बातें समझाई थी  बहुत ही आसान बातें थी  परमुझे वो हमेशा काम आयीं  


नया जॉब था  तब मैं और मेरे दोस्त सब नयें थे  मेरे बॉस बहुत ही स्ट्रिक्ट थे  कभी कोई गलती करें तो बहुत ग़ुस्सा करते थे  हम सबउनसे डरते थे  जैसे समय बीतता गया वह डर कुछ कम हुआ  


एक बार लंच टाईम में हम हमेशा की तरह एकसाथ खाना खाने बैठे थे  तब उन्होंने बताया,” ये हमेशा याद रखनाकभी भी किसी कीगलती होतब उस व्यक्ति के साथ सिर्फ़ उस गलती के बारे में ही बात करें  उसे ये मत कहो की तुम हमेशा ऐसे ही करते होतुम्हारी येबात मुझे पसंद नहींतुम्हारी वो आदत ग़लत है  सिर्फ़ और सिर्फ़ उस गलती के बारे में बात करो “ गुस्से में हम क्या कुछ नहीं कहतेऐसी भी बातें बोलते हैं जिसका उस गलती से कुछ संबंध नहीं 


दूसरी चीज़ मैंने देखी थीवह कितनी बार भी किसी पर गुस्सा करते थे मगर उन्होनें कभी किसी की रिपोर्ट ख़राब नहीं लिखीं  उस बारे मेंमैंने उनसे एक बार पूछा  


वो बोले,” देखोतुम किसी से गुस्से में बात करोगलती से कुछ ग़लत बात करोवह कुछ दिनों बाद भूल जाएगा  मगर तुम जब काग़ज़पर किसी का नुक़सान करते होतो वह तुम कभी बदल नहीं सकते  तुमने काग़ज़ पर किया नुक़सान उस व्यक्ति को हमेशा तकलीफ़देता रहता हैं 


आज वह रिटायरमेण्ट का आरामदायक जीवन जी रहे हैं  आज भी उनसे मिलने जाता हूँ तब उन्होंने सिखायी यह बातें याद  जाती हैं 



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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare


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इमानदारी मराठी

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