मीराबाई चानू, ऑस्कर मस्केरा, सचिन तेंदुलकर, स्टीव जॉब्स, अमिताभ बच्चन, जे के रोलिंग आज इतने सफल हैं । मगर इन सबनेज़िंदगी में असफलता का सामना किया हैं ।
मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम ऊँचा कर दिया । २१ साल बाद भारत ने वेटलिफ़्टिंग में यहपदक जीता । 2016 रियो ओलिंपिक में मीराबाई कोई भी वेट उठाने में नाकामयाब हो गई थीं । उनके हर प्रयास के आगे 'डिड नॉटफिनिश' लिखा गया था । इस हार से वे बहुत दुखी हो गई । उन्हें डिप्रैशन का सामना करना पड़ा । साइकेट्रिस्ट का ट्रिटमेंट लेना पड़ा ।
उनके मन में वेटलिफ्टिंग गेम छोड़ने के विचार आ रहें थे । मगर उन्होंने सब नकारात्मक विचार पीछे छोड़ दिए और जी तोड़ मेहनत की ।उनके मेहनत का फल उन्हें मिल ही गया ।
उसी तरह कोलंबिया के वेटलिफ्टर ऑस्कर मस्केरा की कहानी हैं । ऑस्कर २००४ अथेन्स ओलंपिक में पाँचवें स्थान पर थे । २००८बीजिंग ओलंपिक में वह कोई भी वेट उठाने में नाकाम रहे । अँजुरी और हर्निया के मेजर ऑपरेशन के बाद उन्होंने २०१२ लंडन ओलंपिकमें सिल्वर और २०१६ रिओ ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता ।
२००४ साल में सचिन तेंदुलकर के साथ कुछ ऐसा हुआ था । टेनिस एल्बो के अँजुरी के कारण उन्हें प्लास्टिक की बैट से बच्चों के साथखेलना भी मुश्किल हो गया था । वह डिप्रेशन में चले गए थे । रात २ बजे, ४ बजे दोस्तों को फ़ोन किया करते थे । पत्नी, दोस्त औरनज़दीकी रिश्तेदारों के सपोर्ट से वह फिर से मैदान में उतर गए और अनेकों इतिहास रचे ।
स्टीव जॉब्स को ख़ुद स्थापित एप्पल कंपनी से निकाला गया था । जे के रोलिंग ने हैरी पॉटर बुक लिखीं तब वे डाईवोर्स ले चुकी थी औरबैंकरप्ट थी । अमिताभ बच्चन जी एक समय बैंकरप्ट हो गए थे ।
यह सब आज़ इतने बड़े हों गए हैं । मगर इन सब लोगों ने ज़िंदगी में हर कठिनाई का सफलता के साथ सामना किया । हर बार जबदुनियाँ ने सोचा कि वह ख़त्म हो गये; वह बार किसी फिनिक्स पक्षी की तरह राख से ज़िंदा हों गए । कन्फ़्यूशियस ने कहा है Our greatest glory is not in never falling, but in rising every time we fall !!!
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