Tuesday, October 12, 2021

२००८ का आर्थिक संकट क्या था ? सबप्राइम लोन क्या था ?


२००८ साल में अमेरिका में बहुत बड़ा फायनेंशिल क्रायसिस आर्थिक संकट आया था  जिसने अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरे विश्व कोहिलाकर रख दिया था  क्या था यह संकट ? क्या कारण थे ? और अमेरिका ने कैसे इस संकट से कामयाबी से मुक़ाबला किया  


नब्बे के दशक में अमेरिका में फ़ोरेन फंड  रहें थे  रशियाएशिया से आने वाले इन पैसों के कारण अमेरिका में इतने पैसे हों गए केइन पैसों पर मुनाफ़ा कमाने के लिए बैंकों ने घर के क़र्ज़ मॉर्गेज देने शुरू कर दिए  अमेरिका में होम लोन पाना बहुत ही आसान हो गया कम ब्याजडाउनलोड पेमेंट नहीं और कम कंडिशन्स के कारण लोग नये घर लेने लगे ।अमेरिकन ड्रीम पूरा होने लगा  घरों के बिक्रीमें बड़ी तेज़ी  गई  और साथ में होम लोन मार्केट तेज़ी से बढ़ने लगा  लोग अपना घर बनाने के साथ ही इन्वेस्टमेंट के हिसाब से औरघर ख़रीदने लगे 


बैंकों ने यह जो होम लोन दिए थेवह २०-२५ सालों के लंबे अंतराल के लोन थे  बैंकों ने लोन में दिये वह पैसे २०-२५ साल के विशालअंतराल के बाद उनके पास वापस आने वाले थे  या ऐसा समझें कि इतने लम्बे समय तक उनके पैसे अटके थे  तो बैंकों ने हज़ारों लोनमॉर्गेज एक करके उसका एक बॉण्ड बनवाया जिंसें सिडीओ Collateral Debt Obligation कहा गया  यह बॉण्ड उन्होंने फायनेंशिलइन्स्टिट्यूट जैसे के लेहमन ब्रदर्सपेंशन फंडइन्श्योरेंस कंपनियों को बेच दिए  इस तरह बैंकों ने लोन में दिए पैसेसमय से पहले हीउनके पास  गए 


रियल इस्टेट मार्केट होम लोन मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा था  घरों की क़ीमतें दिनों दिन बढ़ रही थीं  जैसे यह प्रोफ़िट बढ़ता गयाफ़ाइनेंशियल इन्स्टिट्यूट और ज़्यादा सिडीओ माँगने लगे  जैसे डिमांड बढ़ने लगीबैंक ज़्यादा प्रोफ़िट के लालच मेंउन लोगों को भीलोन देने लगीं जिनका क्रेडिट स्कोर कम थाजिनके जॉब क़ायम नहीं थेजो लोन रिस्की थे  इन लोन को सब प्राइम लोन कहते थे।सब यही मान रहे थे कि घरों की क़ीमतें कभी भी कम नहीं होंगी  जब घरों की क़ीमतें बढ़ रही थींतो किसी को कोई फ़िक्र नहीं थी - साल में घर ज़्यादा क़ीमत में बेंचों और लोन वापस करो ऐसा भी कुछ सोच रहे थे 


यह सबप्राइम लोन रिस्की थे  इसलिए कुछ फायनैंशिल इन्स्टिट्यूट ने इन सिडीओ का इंश्योरेंस करवाके लिया  अगर किसी कारणसिडीओ डूब गयातो फायनैंशिल इन्स्टिट्यूट काँ पैसा डूब  जाएँ इसलिये इन सिडीओ का इंश्योरेंस करवाया गया  इन इंश्योरेंस कोक्रेडिट डिफ़ॉल्ट स्वैप सिडिएस कहते थे  ऐसे हज़ारों सिडिएस इंश्योरेंस एआयजी इंश्योरेंस जैसे इंश्योरेंस कंपनी ने किए  फैनी औरफ्रेडी इन इन्स्टिट्यूट ने ऐसे अनेकों इन्श्योरेंस किये  रियल इस्टेट मार्केट में इतनी तेज़ी थीं कि सबको लग रहा था कि यह सिडीओबॉण्ड कभी डुबने वाले नहीं  बैंकों को पैसे मिल गए थेएआयजी जैसी इंश्योरेंस कंपनियों को प्रीमियम का पैसा मिल रहाँ था औरफायनैंशियल इन्स्टिट्यूट को फ़ायदा मिल रहा था  लंदन स्थित एआयजी के छोटेसे ब्रांच ऑफिस का प्रोफ़िट  साल में  गुना बढ़गया (हर साल  बिलियन डॉलर अब सब इससे बिलियन डॉलर्स का प्रोफ़िट कमा रहे थे 


मगर २००७ साल में रियल इस्टेट मार्केट गिरने लगा  घरों के क़ीमत में गिरावट आने लगी  जिस क़ीमत पर लोन लिया थाघरों कीक़ीमत उससे भी कम हो गई  लोगों ने क़र्ज़ की किश्तें भरना बंद कर दिया  लोन डिफ़ॉल्ट होने लगे  लोग घर बेचने लगे  मार्केट मेंइतने घर बेचने के लिए  गए के उससे घरों की क़ीमतें और भी कम हो गई  बाज़ार में हज़ारों घर बेचने के लिए थे लेकिन उन्हें ख़रीदनेके लिए कोई नहीं था 


जैसे लोगों ने क़र्ज़ की किश्तें भरना बंद कर दियावह होम लोन डिफ़ॉल्ट होने लगेंवैसे सिडीओ बॉण्ड फेल होने लगे  जब यह बॉण्डफेल होने लगेतो इन्श्योरेंस कंपनियों कोसिडीओ इन्श्योरेंस के तहतयह पैसे फ़ाइनेंशियल इन्स्टिट्यूट को देना आवश्यक था इन्श्योरेंस कंपनियाँ जो अब तक सिर्फ़ प्रीमियम ले कर फ़ायदे ले रही थींउन्हें बॉण्ड के पैसे देने ज़रूरी थे और वह रक़म बिलियन डॉलर्सकी थीं  बैंकफ़ाइनेंशिय इन्स्टिट्यूट और इन्श्योरेंस कंपनियाँ सब ख़तरे में  गयी  मार्केट में लिक्वीडिटी ख़त्म हो गयी  सब नयें लोन भी रूक गए  यह बहुत ही गंभीर परिस्थिति हो गई थी  


एआयजी ने ४४० बिलियन डॉलर के सिडिएस इंश्योरेंस दिए थे और यह पैसे देना उन्हें नामुमकिन था  १५ सितंबर २००८ में एआयजीइन्श्योरेंस कंपनी के पास पैसे बचें नहीं  उसी दिन लेहमन ब्रदर्स कंपनी दिवालिया हो गई  एआयजी अमेरिका की सबसे बड़ी इंश्योरेंसकंपनी थींजिसके ८० से ज़्यादा देशों में ब्रांच ऑफिस थे  लगभग सभी बैंक कंपनियों से उनके संबंध थेलाखों पॉलिसी एआयजी केपास थी  एआयजी कंपनी डूब जाती तो सारे विश्व में उसका बूरा प्रभाव पड़ सकता था  फैनी और फ्रेडी कंपनियों ने  ट्रिलियन डॉलरके क़रीब मॉर्गेज इंश्योरेंस कर दिए थे  सब एक-दूसरे के साथ जूड़े हुए थे  


यह एक असाधारण परिस्थिति थीं  अगर अमेरिका योग्य कदम नहीं उठातीतो अमेरिका ही तों पूरे विश्व में बैंकिंग प्रणाली ख़त्म होजाती  यह बहुत गहरा संकट था और बहुत धैर्य और समझदारी से इस संकट से उबारना ज़रूरी था  अमेरिका कैसे इस संकट सेनिपटने में कामयाब रही यह हम अगले वीडिओ में विस्तार से जानेंगे 


प्रमोद वाघमारे


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इमानदारी मराठी

  इमानदारी अंग अवघडून गेलंय… तीन तास गाडी चालवायची आणि त्यात हा घाटातला रस्ता… यावर एकच औषध आहे, दोन पेग मारायचे… पण मैं पीता नही ना… एसीपी ...