कुछ सालों से मैं बँक में एक असिस्टेंट मैनेजर को देखता आ रहा हूँ । जब भी मैं उस बँक में जाता हूँ, मैंने देखा है, बाक़ी के कर्मचारी उसमैनेजर के पास उनके कुछ प्रॉब्लम लेकर आते हैं । और वह हाथ में लिया काम छोड़कर उन्हें मदद करता है । वह बहुत ही अच्छा मैनेजरहैं, मगर उसे ‘ना’ बोलना नहीं आता । जिसके कारण उसके ख़ुद के काम लेट हो जाते हैं, रोज़ देर रात तक काम करना पड़ता हैं ।
कितने साल वह उसी पोज़ीशन पर काम कर रहा है । आप अगर ‘ना’ नहीं कह सकें, तो उसका परिणाम आपके काम पर होनास्वाभाविक है । आप पर कामों का बोझा बढ़ता ही जाएगा ।
आप बिज़नेस में एक समय कितने काम समय पर और अच्छी तरह से, क्वॉलिटी के साथ कर सकते है यह अगर आपको पता होगा; तोआप कुछ कामों को ‘नहीं’ कह सकते हो । जिससे आप आपके अच्छे क्लायंट को अच्छी सर्विस दे सकेंगे और कुछ अनावश्यक कामोंको टाल सकेंगे ।
यह बात स्टडीज़ में छात्रों को भी लागू होती हैं । मोबाइल से लेकर मित्र परिवार तक; अनेक चीजें आप स्टडी करते वक़्त टाल सकते हैं ।
आप ‘नहीं’ कहते वक्त किस तरीक़े से ‘नहीं’ कहते हैं वह भी महत्वपूर्ण हैं । आपके ‘ना’ से किसी प्रकार की शत्रुता द्वेष न उत्पन्न हो ।और ना ही आपके ‘ना’ से ऐसा लगें की आप आप कि ज़िम्मेदारी से दूर भाग रहे हो । आप ‘ना’ विनम्रतापूर्वक कह सकते हैं ।
‘हाँ’ या ‘ना’ कहने से पहलें; आपका लक्ष्य क्या हैं और आपकी प्राथमिकता क्या हैं; इसके बारे में पहले सोचें । उसके बाद आपकोनिर्णय लेना आसान होगा ।
आप सीधे ‘ना’ करने के बजाय, आप किसी दूसरे व्यक्ति या दूसरे डिपार्टमेंट या दूसरे संस्था का नाम उस काम के लिए प्रस्तावित करसकते हैं । या उन्हें कुछ समय तक रूकने को कह सकते है ।
आप की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आपको ‘नहीं’ बोलना सिखना आवश्यक है ।
प्रमोद वाघमारे
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