Tuesday, June 29, 2021

Linda’s Marathon (हिंदी)

रविवार २४ अक्तूबर १९८२

२६ माईल्स की न्यू यॉर्क मैराथन |  एक २५ वर्षीय युवती । जिसने यह मैराथन सबसे अंत में पूरी की थीं । मगर जिसका अमेरिकी राष्ट्रपति ने सम्मान किया था ।


लिंडा डाव्न । सोशल सायन्स में मास्टर डिग्री पानेवाली यह लड़की । लिंडा को सेरेब्रर पाल्सी यह दुर्धर रोग था; जिसके कारण उसे चलने के लिये कैनेडियन केन ऐल्यूमिनियम क्रचेस का सहारा लेना पड़ता था । जिसके लिए बस चलने में इतनी कठिनाई हो; उसके लिए २६ मिल की मैराथन पूरा करना लगभग असंभव था ।

मगर लिंडा को पूरा विश्वास था । मैराथन के लगभग ६ महीने पहले उसने क्रचेस पर भागना शुरू कर दिया । वह दिन-भर जॉब ढूँढने जाती और शाम को न्यू यॉर्क शहर में भागने की प्रैक्टिस करतीं थीं । पहले पहले वो इतनी स्लो थीं कि एक माईल भागने के लिए उसे २५ मिनट लगते थे । देर रात वह घर पहुँचती थी । बिना आत्मविश्वास खोये, वह लगातार प्रैक्टिस करतीं रहीं । 


मैराथन के दिन उसकी बहन, माँ और एक दोस्त उसे प्रोत्साहित करने आए थे । क्रचेस पर हाथ घिसने से बचने के लिये उसने लेदर ग्लव्ज पहनें थे । मैराथन जैसे ही शुरू हो गयी; सब रनर तेज़ी से आगे बढ़ गए । लिंडा क्रचेस के सहारे मैराथन में भागने लगीं । थोड़ी देर बाद; न रनर थे, न दर्शक । सब बैरिकेड भी निकालें गए थे । लिंडा अकेले रास्ते से चल रही थी; भाग रहीं थीं ।


लिंडा बहुत थकीं थीं, मगर चल रही थी । ब्रुकलिन में उसे देखकर एक छोटी बच्ची दौड़कर उसके सामने आई और बोली,” यू कैन डू इट ।” । बीच में लोगों का एक ग्रूप उसे देखकर “किप इट अप।” चिल्लाते तालियाँ बजाकर उसे प्रोत्साहित करने लगा । वह इतनी लेट हो गई थी, की शहर का ट्रैफ़िक भी चालू कर दिया गया था । वह अकेली मैराथन दौड़ रही थी ।


जैसे ही उसने मैराथन के १० मील पूरे कर दिए; एबीसी न्यूज़ के कैमरे वहाँ पहुँच गए । वे आख़िर तक लिंडा के साथ थे । जैसे लिंडा आगे बढ़ने लगीं; उसके हाथ बहुत दर्द देने लगे ।


जब न्यू यॉर्क के सेंट्रल पार्क में वह पहुँचीं; तब रात के साढ़े नौ बज गए थे । ११ घंटे बाद लिंडा ने न्यू यॉर्क मैराथन कम्प्लीट कर दी । क्रचेस पर मैराथन पूरी करने वाली वह पहली महिला थीं । अगले ही दिन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रिगन ने लिंडा का व्हाइट हाउस में सम्मान किया ।


लिंडा ने मैराथन सबसे अंत में कम्प्लीट किया था; पर वो सचमुच विजेता थीं । यह बात सच है कि खुद पर विश्वास हो तो सब कुछ मुमकिन है ।


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(C) Pramod Waghmare

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