सुबह सुबह मुझे मेरे क्लायंट का फ़ोन आया । “गुड मॉर्निंग सर । कैसे हैं आप?” मैं बोला ।
क्लायंट फ़ोन पर,” सुनिये । मैंने जो इंश्योरेंस पॉलिसी निकाली हैं वो मुझे अर्जेंट चाहिये ।”
मैं बोला,” यस्सर । आज ही पोस्ट कर देता हूँ । दो चार दिन में आपको मिल जायेगी ।”
“नहीं मुझे वो आज ही चाहिये । मेरे घर पर मेरी माँ होगी । उसे १२ बजे से पहलें दे दीजिए ।” कहकर उन्होंने फ़ोन कट कर दिया।
कमाल होते यें क्लायंट भी । कभी पॉलिसी के बारे में पुछते भी नहीं और कभी इतनी जल्दी करते हैं... चलो होता हैं ।
मैंने सब पॉलिसी डॉक्यूमेंट ले लिए और क्यायंट के घर पोहोंच गया । कुछ लोग बैठे थे । घर में उदासी का माहौल था ।
क्यायंट की बूढ़ी माँ मुझसे मिलने आयी । साथ में एक सात आठ साल की छोटी बच्ची थी ।
“माँ जी। मैं इंश्योरेंस कंपनी से आया हूँ । आपके बेटे ने हमारी कंपनी में पिछले महीने एक करोड़ का लाईफ़ इन्श्योरेंस और बेटी केपढ़ाई के लिए पचास लाख की पॉलिसी करवायी थी । सुबह आपके बेटे का फ़ोन आया था । आपको अर्जेंट पॉलिसी डॉक्यूमेंट देने केलिए बताया था । लगता आज घर नहीं है वो।” मैं बोला ।
माँ के आँखों से आँसू छलके,” मेरा बेटा और बहूँ अब इस दुनिया में नहीं रहे । चार दिन पहले कार एक्सीडेंट में ...”
तभी मेरी नज़र कॉर्नर में रखें दोनों के फ़ोटो पर पड़ी ।
“ओह सो सॉरी । मुझे माफ़ कीजिये । सुबह आपके घर के किसी ने फ़ोन किया होगा ।” मैं बोला ।
“मेरा एक ही बेटा था । और इस पॉलिसी के बारे में हमें किसी को भी कुछ पता नहीं ।”
मैंने उनको पॉलिसी डॉक्यूमेंट दिए और उन्हें बताया की कुछ ही दिनों में हम उनको पॉलिसी के पैसे दे देंगे ।
उनके घर से निकलते वक्त मैं यही सोच रहाँ था की आख़िर मुझे किसने फ़ोन किया था?
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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