आराम से बुक पढ़ रहा था । तभी मेरे बच्चे कॉलेज के ऑनलाइन लेक्चर्स ख़त्म करके मेरे पास आ गये ।
“क्या हम ये लॉकडाऊन हर साल कर सकते हैं?” मेरे बेटी का सवाल ।
“ये हम नहीं कर सकते ।” मैं बोला ।
“क्यों नहीं? प्रदूषण इतना कम हो गया है । इतनी स्वच्छ हवा, इतना शुद्ध पानी ।” बेटा बोला ।
“सब इंडस्ट्रीज़ बंद पड़ेगी । विश्व की अर्थव्यवस्था बिगड़ जायेगी । ये कभी संभव नहीं ।” मैं बोला ।
“अगर हम हर साल सिर्फ़ एक हफ़्ता सारे विश्व में लॉकडाऊन कर सके तो?” बेटी बोली ।
“सारा विश्व एक हफ़्ता बंद?” मैंने पुछा ।
“हम एक साल पहले ही अगले साल का लॉकडाऊन का एक हफ़्ता डिसाईड करेंगे । जब सब कुछ बंद रहेगा । सब मिलकर वो हफ़्ताफ़ाइनल करेंगे जिससे त्योहार और सब चीज़ें ध्यान में रखकर प्लानिंग कर सकते हैं ।” बेटा बोला ।
“ओके, फिर?”
“उससे सब इंडस्ट्रीज़ स्कूल काॅलेज पहले से ही अपने काम प्लान कर सकेंगे । अति आवश्यक सेवाएँ भी प्लान कर सकते हैं । न कोईकंपनी चलेगी, न कोई गाड़ी रस्ते पे आएगी ।” बेटी बोली ।
“मगर फिर सब छुट्टी समझकर घुमने जायेंगे ।” मैं ।
“टूरिस्ट जगहों पर भी कोई गाड़ी नहीं चलेगी । तुम्हें वहाँ भी होटल में ही रहना होगा । हाँ पैदल आप कहीं भी घुम सकेंगे ।” बेटा बोला ।
बच्चों के बातों में सच्चाई तो थी ।
“सच्चाई और विश्वास से किया तो ये संभव हो सकता हैं । हम भारतीय इसका आरंभ कर सकते हैं और विश्व के सामने एक अच्छाउदाहरण रख सकते हैं ।” मैं बोला ।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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