“सर, प्लीज़ आप मेरे पैसे दे दिजीए । मैंने लोन उठाया है । दो साल किश्तें भर कर मेरी जमा पूँजी ख़त्म हो गई हैं । प्लीज़ ।” वहगिड़गिड़ाते हुए अफ़सर से बोला ।
अफ़सर बोला,” आप तो जानते हैं की मैं आपके लिए कितनी कोशिश कर रहा हूँ । इस महीने आपका काम हो जायेगा ।”
“सर, अब दो साल हो रहें है । प्लीज़ दे दीजिए ।” हाथ जोड़कर वह केबिन के बाहर गया ।
“दोस्त, इसका तो काम कितना आसान हैं । मुझे समझ नहीं आ रहा। तुम उसका काम कर क्यों नहीं देते?” केबिन में बैठे अफ़सर केदोस्त ने उसे पुछा ।
“क्या करे यार । अपने बड़े साहब हैं ना वो इसके रिश्तेदार हैं । उन्होंने बताया हैं रोकने के लिए । उनकी कुछ दुश्मनी होगी उससे ।” अफ़सर बोले ।
दोस्त बोला,” पर वह उनकी पर्सनल बातें हैं । इस काम में उसका क्या संबंध ? वह व्यक्ति तकलीफ़ में हैं ये दिख रहा हैं । तुम जो कर रहेहो मुझे ग़लत लगता हैं, पाप लगता हैं ।”
अफ़सर ज़ोर से हँसते हुए बोला,” दोस्त, कौन से जमाने में रह रहे हो ? बड़े साहब ने बहुत बार मेरी मदद की हैं । और आगे भी वह मेरेकाम आयेंगे । सहीं ग़लत पाप पुण्य ? ये नया जमाना है मेरे दोस्त ।”
आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें 🙏🙏🙏
प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
#pramodplanet #pramodwaghmare