एक दिन मेरे सुप्रीम कोर्ट के सिनीयर एडवोकेट दोस्त के ऑफ़िस में बैठा था । तब उनकी एक क्लायंट अपनी बेटी को लेकर वहाँ आगयी थी।
“सर, ये मेरी बेटी है । इस साल वकील बन जायेगी ।” क्लायंट ने बताया ।
“वाह, बहुत बढ़िया ।” मेरे दोस्त बोले ।
“थैंक्यू सर ।” विनम्रतापूर्वक बेटी बोली ।
“पढ़ाई के साथ और क्या करतीं हो?” दोस्त ने पुछा ।
“सर, मैं पिछले पाँच सालों से शास्त्रीय संगीत सिख रहीं हूँ ।”
उस बात पर मेरे वकील दोस्त बोले,” क्या बात हैं । बेटा, वकीली का काम तुम्हें जीवन जीने के साधन देंगे । और संगीत तुम्हें यह जीवनक्यों जीना है ये सिखायेगा ।“
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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