कितनी शानदार पार्टी थी । सब मेरे पड़ौसी को उनकी प्रमोशन के लिए बधाई दे रहे थे । मैं उन्हें कब से देख रहा था । कितना कॉन्फ़िडेंसथा उन में । सब लोगों से हँसकर बातें कर रहे थे ।
“वाह क्या बात हैं । आपके जैसा कॉन्फ़िडेंस मैंने बहुत ही कम लोगों में देखा हैं ।” पार्टी ख़त्म होते होते पड़ौसी को थोड़ा रिलैक्स देखकर मैं बोला । उन्होंने विनम्रतापूर्वक हाथ जोड़े ।
मैं आगे बोलने लगा,” लगता हैं जैसे आप कभी हार ही नहीं सकते । कहाँ से लाएँ आप इतना आत्मविश्वास?”
“आपको पता नहीं मगर मैं पढ़ाईं में बिलकुल कमज़ोर था ।” पड़ौसी मुझे बताने लगे,” पढ़ाईं के बाद रिश्तेदार के पहचान से एक नौकरीमिल गयी । पर वहाँ भी मुसीबतों का सामना करना पड़ता था । मैं ग़लतियाँ करता था और सब मुझसे ग़ुस्सा होते थे और मैं ज़्यादा हीग़लतियाँ करता था।”
“ओह ।” मैं बोला ।
“ मेरा आत्मविश्वास जैसे ख़त्म हो गया था । तभी मेरे ब्रांच में एक नये अफ़सर आ गये । एक दिन उन्होंने मेरा एक रिपोर्ट देखा औरउन्होंने मुझे अपने केबिन में बुला लिया । मैं तो बहुत ही डर गया था ।”
“फिर?” मैंने पुछा ।
“ उन्होंने मेरी रिपोर्ट सामने रखते हुए कुछ पॉइंट पढकर मेरी खूब तारीफ़ की । मैं मेरी तारीफ़ पहली बार सून रहाँ था । मैं इतना खुश होंगया उस दिन। मैंने अगली रिपोर्ट ज़्यादा मेहनत के साथ बनायीं । उन्होंने मेरी और तारीफ़ की । उनकी तारीफ़ सुनने के लिए मैं औरज़्यादा मेहनत करने लगा ।”
“वाह । सहीं हैं ।” मैं बोला ।
“ तीन साल बाद उनकी ट्रांसफ़र हो गयी और उसी दिन मुझे एम्प्लॉई ऑफ दी इअर पुरस्कार मिला ।
मैं उनसे मिलने गया ।
मेरे कंधे पर हाथ रखकर वो बोले,” ये कॉन्फ़िडेंस ये आत्मविश्वास कभी कम नहीं होने देना ।”
और सचमुच उस दिन के बाद मेरा आत्मविश्वास कभी कम नहीं हुआ ।” पड़ौसी ये मुझे बता रहे थे तब उनकी आँखे आत्मविश्वास सेचमक रही थीं ।
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प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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