अचानक सीनेमें असहनीय दर्द होने लगा । साँस घुटने लगीं ।बड़ी मुश्किल से बाईक साईड में लेते लेते मैं नीचे गिर गया ।
कुछ लोग मुझे उठा रहे थे... अस्पताल में स्ट्रेचरपर ले जा रहे थे । उपर सिलिंगकी लाईट्स पिछे जा रही । मेरे बीवी बच्चोंके चेहरे सामनेआ रहे थे ...
ओटी में जाते जाते इक डाक्टर सामने आ गये । मुझे देखकर मुझे पहचानते हंसते हुए उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर कहा,” डोन्टवरी ।”
दो महीने पहले... चिंगारी भड़की । पुरा शहर जलने लगा । इसी व्यक्ती को उसके घरवालों और उसके पड़ोसी फ़ैमिली को हम कुछलोगोंने पिटा था, उनके घर में तोड़फोड़ की थी ।
उस रात वह दोनों फ़ैमिली अपने घर छोड़कर चलें गये थे । उसी व्यक्ती के साथ मैं ओटी में जा रहा था । ग्लानि के कारण मेरी आँखें बंदहो गयी...
थोडा होश आने लगा । नर्स की आवाज़,” पेशंट को होश आने लगा है ।”
मेरी पत्नी मेरी तरफ़ आ रही थी । उसके चेहरे पे चिंता और ख़ुशी के मिश्रित भाव थे ।
तभी वहीं डाक्टर सामने आये, “डोन्ट वरी । दो दिनों में हम आप को डिस्चार्ज कर देंगे ।” बात करते करते उस इंसान ने मेरा हाथ अपनेहाथ में ले लिया ।
मैं कुछ बोल न पाया । मेरे आँखों से आँसू बह रहे थे...
प्रमोद वाघमारे
आपले अभिप्राय नक्की लिहा
#pramodplanet