कब से दरवाजे को देख रहीं हूं
अब दोपहर हो गयी है,
कितनी धूप है बाहर
वो आने वाला है...
इसी आंगन में खेलता था वो
कितना बुद्धिमान मेरा बच्चा
स्कूल में पहला, कालेज में पहला
कब इंजीनियर बना और कब अमरिका गया...
उसके पिताने क्या नहीं किया उसके लिए
अपनी दुकान तक बेची उसके पढ़ाई के लिए
पर उसने वो वापिस खरीद लीं
उसकी शादी क्या धूमधाम से की थीं हमनें...
चार साल हो गये
पिता चल बसे तब आया था वो
दो चार दिनों में फोन आता था उसका
अब महिनें महिनें आता हैं
दो साल हुए पोता हुआ
उसके फ़ोटो भेजता हैं मुझे...
हर महीने मुझे पैसें भेजता हैं
बहुत प्यार करता हैं मुझे वो...
पर मुझे पैसें नहीं चाहिए...
मुझे उससे मिलना है, बहू से बातें करनी हैं
पोते के साथ खेलना हैं...
वो बोला मै आऊंगा
पड़ोसन कहती हैं वो नहीं आयेगा,
बिल्कुल पागल हैं वो...
मुझे पता हैं वो आने वाला हैं...
बाहर गाड़ी रुकीं कोई
लगता हैं मेरा बच्चा आ गया...
प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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