रविवार की मस्त सुबह । आरामसे लेट उठा । कल रात पार्टीमें थोडा ज्यादाही लेट हो गया था ।
‘यार लाईफ हो तो ऐसी’ ऐसे सोचते हुए अपने मुलायम बिस्तरसे बाहर निकला और अपना कर्तव्य याद आया
‘यार, दो राऊंड तो मारने ही है ।’
तैय्यार हो के इक्कीसवें फ्लोरसे चकचकाती लिफ्टसें निचे उतरके इटैलियन मार्बल के आलीशान लॉबी से सोसायटी के गार्डन तक पोहोंचते पोहोंचते ‘लाईफ़ हो तो ऐसी’ गुनगुना रहा था ।
सामने गार्डनमें बहुत सारे इन्सान इकठ्ठे हुए थे। कुछ सजधज के आये तो कुछ सिधे बिस्तरसे उतरके आये थे । उनमेंसे तो कुछ महिनोंतक दिखते नही ऐसे थे ।सब ज़ोर शोर से कुछ बातें कर रहे थे । एक ‘ज़िम्मेदार नागरीक’ होने के कारण मैं भी उस झुंड में घुस गया ।
इन्सान १ “अरे राजा हुआ तो क्या हुआ? शेरसिंग राजा कह रहा है की स्टेशन के लिये जगह चाहिये । हमें अपने घर तुरंत ख़ाली करने है ।
इन्सान २ “वाह रे वाह, ऐसे कैसे ख़ाली करेंगे, कितने सालोंसे हम रह रहे है यहाँ ।
मैं हलकेसे “ फिर यहाँ से कहाँ जायेंगे?”
इन्सान ३ “उन्होंने सरकारी घर बाँधे है हमारे लिये अपने घरोंके साईज़ की।”
“हाँ पर वो सरकारी घर कहाँ और अपनी सोसायटी कहाँ” अपने आलीशान सोसायटी पे नज़र घुमाती इन्सान ४ बोली ।
इन्सान २ “वो फ़िश अंकल तो कह रहे रहे थे की पानी में रास्ते और नदी किनारे के रास्तोंसे उनकी इकोसिस्टिम ख़राब हो रही है। इसलिये वो रास्तेभी बिल्डिंग्ज तोड़कर ही होंगे ।”
इन्सान ३ “मगरमच्छजी भी वही बात कर रहे थे, नो रिव्हरफ्रंट “
इन्सान ४ “अैमेझॉन रानी कह रही थी की जंगल के पशुपक्षीयों को रहने के लिये घर नहीं। कुछ भी...”
इन्सान ५ “पोलर बेअर तो बता रहें थे की २०३० तक आर्क्टिक का सब आईस पिघल रहा है । इसलिये अपने बिल्डिंग्ज तोड़कर आर्टिफिशल आईस लँड बनायेंगे वहाँ।”
इन्सान ६ “ पर ये तो अन्याय है। वो हमें हमारे घरसे बाहर कैसे निकाल सकते है? ये सब ग़लत है...”
सब मानव एक साथ “हाँ ये सब ग़लत है...हाँ ये सब ग़लत है...हाँ ये सब ग़लत है...”
“हाँ ये सब ग़लत है... वाट द फ....” और तभी मेरी आँखें खुल गयी ।
साला ये तो ड्रीम था । कल पार्टी में थोड़ी जादा हो गयी । इस लिये ऐसे ड्रीम्स आ रहे है ...
आईफ़ोन में देखा। ७ बजे थे ।
“साला संडेको कोई ७ बजे उठता है क्या? क्या बचकाना ड्रीम था। नेचर गया...”
बोलते हुए थंडे थंडे एसी में मुलायम बिस्तरपर रज़ाई ओढ़कर मै आरामसे सो गया ।
‘लाईफ हो तो ऐसी’
वैधानिक इशारा : ये इक पूर्णत: काल्पनिक ड्रीम है। रिलॅक्स। अब आप आरामसे सो सकते है ।
प्रमोद वाघमारे
विशेष आभार संजय विघ्ने
https://pramodplanet.blogspot.com/
#pramodplanet #growforests
‘यार लाईफ हो तो ऐसी’ ऐसे सोचते हुए अपने मुलायम बिस्तरसे बाहर निकला और अपना कर्तव्य याद आया
‘यार, दो राऊंड तो मारने ही है ।’
तैय्यार हो के इक्कीसवें फ्लोरसे चकचकाती लिफ्टसें निचे उतरके इटैलियन मार्बल के आलीशान लॉबी से सोसायटी के गार्डन तक पोहोंचते पोहोंचते ‘लाईफ़ हो तो ऐसी’ गुनगुना रहा था ।
सामने गार्डनमें बहुत सारे इन्सान इकठ्ठे हुए थे। कुछ सजधज के आये तो कुछ सिधे बिस्तरसे उतरके आये थे । उनमेंसे तो कुछ महिनोंतक दिखते नही ऐसे थे ।सब ज़ोर शोर से कुछ बातें कर रहे थे । एक ‘ज़िम्मेदार नागरीक’ होने के कारण मैं भी उस झुंड में घुस गया ।
इन्सान १ “अरे राजा हुआ तो क्या हुआ? शेरसिंग राजा कह रहा है की स्टेशन के लिये जगह चाहिये । हमें अपने घर तुरंत ख़ाली करने है ।
इन्सान २ “वाह रे वाह, ऐसे कैसे ख़ाली करेंगे, कितने सालोंसे हम रह रहे है यहाँ ।
मैं हलकेसे “ फिर यहाँ से कहाँ जायेंगे?”
इन्सान ३ “उन्होंने सरकारी घर बाँधे है हमारे लिये अपने घरोंके साईज़ की।”
“हाँ पर वो सरकारी घर कहाँ और अपनी सोसायटी कहाँ” अपने आलीशान सोसायटी पे नज़र घुमाती इन्सान ४ बोली ।
इन्सान २ “वो फ़िश अंकल तो कह रहे रहे थे की पानी में रास्ते और नदी किनारे के रास्तोंसे उनकी इकोसिस्टिम ख़राब हो रही है। इसलिये वो रास्तेभी बिल्डिंग्ज तोड़कर ही होंगे ।”
इन्सान ३ “मगरमच्छजी भी वही बात कर रहे थे, नो रिव्हरफ्रंट “
इन्सान ४ “अैमेझॉन रानी कह रही थी की जंगल के पशुपक्षीयों को रहने के लिये घर नहीं। कुछ भी...”
इन्सान ५ “पोलर बेअर तो बता रहें थे की २०३० तक आर्क्टिक का सब आईस पिघल रहा है । इसलिये अपने बिल्डिंग्ज तोड़कर आर्टिफिशल आईस लँड बनायेंगे वहाँ।”
इन्सान ६ “ पर ये तो अन्याय है। वो हमें हमारे घरसे बाहर कैसे निकाल सकते है? ये सब ग़लत है...”
सब मानव एक साथ “हाँ ये सब ग़लत है...हाँ ये सब ग़लत है...हाँ ये सब ग़लत है...”
“हाँ ये सब ग़लत है... वाट द फ....” और तभी मेरी आँखें खुल गयी ।
साला ये तो ड्रीम था । कल पार्टी में थोड़ी जादा हो गयी । इस लिये ऐसे ड्रीम्स आ रहे है ...
आईफ़ोन में देखा। ७ बजे थे ।
“साला संडेको कोई ७ बजे उठता है क्या? क्या बचकाना ड्रीम था। नेचर गया...”
बोलते हुए थंडे थंडे एसी में मुलायम बिस्तरपर रज़ाई ओढ़कर मै आरामसे सो गया ।
‘लाईफ हो तो ऐसी’
वैधानिक इशारा : ये इक पूर्णत: काल्पनिक ड्रीम है। रिलॅक्स। अब आप आरामसे सो सकते है ।
प्रमोद वाघमारे
विशेष आभार संजय विघ्ने
https://pramodplanet.blogspot.com/
#pramodplanet #growforests
(C) Pramod Waghmare