एक लोककथा हैं ।
इक बार एक राजा ने अपने नये सरदार की परीक्षा ली । राजाने उसे एक कटोरेमें तेल दिया और अपने राजमहल के पुरे बगीचेंमे घुम आनेको कहा ।
सरदार बगीचेमें घुमके वापस आया ।
राजा ने देखा की कटोरेंमें तेल जैसे के तैसा था।
राजाने सरदारसे पुछा, “अब मुझे बताओ तुमने बगीचेमें क्या क्या देखा?”
सरदार बोला, “मेरा ध्यान तो पुरा तेल पे था, तो मैंने बगीचेमें कुछ नहीं देखा ।”
राजा बोला, “ठीक है । तो एक बार फिर से घुम के आओ ।”
थोडी बार सरदार वापस आया । इस बार सरदारनें बगीचेमें देखी हर सुंदर चीज़ विस्तार से बताई ।
राजा बोला, “ बराबर है, पर कटोरेमें तेल कहाँ है?”
सरदारने देखा । बगीचा देखते देखते तेल रास्ते में गीर गया था ।
राजा बोला, “बगीचा देखना जरूरी है पर साथ में तेल भी गिरना नहीं चाहिये ।”
ज़िंदगी में काम करते करते हम अपने छोटे छोटे ख़ुशी के पल जानेअंजाने नज़रअंदाज़ कर देते है । ये दोनों चीजें हमारी ज़िंदगी बनाती है।
उसी तरह प्रगतिकी होड़ में हम सब अपनी इस खूबसूरत पृथ्वी का विनाश तो नहीं कर रहे ये देखना आवश्यक है !!!
प्रमोद वाघमारे
#pramodplanet #growforests