पर एक इन्तजार करती मां का दर्द एक इन्तजार करती मां ही समझ सकती है ,जैसे के मैं। (एक माँ कीं प्रतिक्रिया)
हां वो आने वाला है (हिंदी) और व्हय त्यो येनार हाय (मराठी) दोनों को आज २५ हजार से भी ज़्यादा पाठकोंने लाईक किया है । आप सब पाठकों का मैं आभारी हूँ ।
ग्लोबलाइज़ेशन के साथ सारा विश्व जैसे एक गाँव (ग्लोबल विलेज) बन गया । उस के साथ ही अब हमारे बच्चे दूर शहरों में, दूर देशों में कभी पढ़ाई के लिये, कभी जॉब्स के लिए जाने लगे । बाहर अच्छे अच्छे अवसर उपलब्ध होने लगे और साथ ही दिखाई देने लगे बिछड़ें परिवार ।
बेटे बेटियाँ अब दूर देश, दूर शहरों में सैटल हो गये और अब घर पे हैं बुढे माँ बाप । कितने सारे लोग अब दिखते हैं अपने बच्चों का इंतज़ार करते । कभी वो बच्चों को मिलने उनके शहर, उनके देश जाते हैं ।और जब बच्चे बहू या जमाईं या पोते पोतियों के साथ यहाँ घर आते हैं तो कितनी ख़ुशी छलकती हैं उनके चेहरों पर । कुछ गाँवों में तो अभी सिर्फ़ वृद्ध व्यक्ति ही दिखाई देते हैं ।
बच्चों की प्रगति होनी चाहिए । बच्चों की उड़ान हमें रोकनी नहीं चाहिए । साथ ही माता पिता परिवारोंसे दूर रहते बच्चे यह भी वास्तविकता हैं । क्या बराबर क्या ग़लत ?
आपने इस छोटी सी कथा को जो प्यार दिया उसके लिए आप सब का मैं हमेशा आभारी रहूँगा । आप का प्यार हमेशा साथ रहे । आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें ।
प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare
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