Thursday, December 5, 2019

वह लड़की (हिंदी)

स्कूल के सामने बहुत ट्रैफ़िक थी । इसलिये एक अस्पताल के सामने रोड पर उसने अपनी आटोरिक्शा लगायी और जल्दी जल्दी वह स्कूल के तरफ़ चलने लगा । स्कूल से लगातार फ़ोन आ रहें थे उसे ।

उसकी बेटी अब सातवीं कक्षा में पढ़ रही थी । वह खुद कम पढ़ा था पर अपनी इकलौती बेटी खुब पढ़े, बहुत बड़ी बन जाये यहीं उसकी इच्छा थी । इसलिये शहर के एक बड़े स्कूल में उसने अपनी बेटी का एडमिशन लिया था । बहुत श्रम कष्ट कर वह उसके सब ख़र्च उठा रहा था ।

बेटी भी प्रतिभाशाली थी, खुब पढ़ाई कर रहीं थीं । क्लास में हमेशा फ़र्स्ट आती थी ।

कल रात उसके बेटी ने बताया । ग़र फ़ी नहीं भरीं तों उसे स्कूल से निकाला जायेगा । बढ़ी फ़ी और बिमारी के कारण इस साल वह फ़ी भर नहीं पाया । सुबह से कुछ उधार लेकर उसने २५ हज़ार रूपये जमा किए और वहीं पैसे लिए वह स्कूल के तरफ़ जाने लगा ।

जातें जातें अस्पताल के दरवाज़े के सामने उसके बेटी के उम्र की एक लड़की डाक्टर को विनती करते बोल रही थी, “डाक्टर प्लीज़ मुझे मदद किजीए । मेरे पास इतने पैसे नहीं । मेरे माँ को बचाइये ।”
उसके आँखों से आँसू बह रहे थे । डाक्टर उसे बोले, “मैं
कुछ नहीं कर सकता । आपरेशन के २५,००० भर दो, हम फ़ौरन आपरेशन कर देंगे ।”

न जाने क्यों पर वह वहीं ठहर गया । उस लड़की के पास जाकर उसने उससे सब पुँछ लिया । बिना कुछ सोचे उस ने पॉकेट से पैसे निकाले और आपरेशन के लिए भर दिए । लड़की ने हाथ जोड़कर उसके आभार मान लिये ।

स्कूल में प्रवेश करते वक्त उसकी धड़कनें तेज़ हो गयीं थी । अब क्या होगा? मैंने ये क्या किया? मेरी बेटी को स्कूल से निकाल तो नहीं देंगे? सोचते सोचते वो स्कूल में गया । उसे स्कूल के संचालिका ने ऑफ़िस बुलाया था ।

ऑफ़िस में प्रवेश करते ही संचालिका ने पुछा, “ सुबह से आप को फ़ोन कर रहे हैं हम । फ़ोन क्यों नहीं उठाया?”

“मुझे माफ़ कीजिए ।” बोलते बोलते उसकी नज़र नीचे झुक गयी । वह पसीने से पुरी तरह से भीग गया था। अब इन्हें मैं क्या बताऊँ ?

तभी संचालिका बोलीं, “आपके लिए एक अच्छी ख़बर है । एक बड़ी कंपनीने एक प्रतियोगिता लियी थी और आपके बेटी के साथ और दो लड़कियाँ सिलेक्ट हो गयीं । इन लड़कियों का ग्रैजुएशन तक का सब ख़र्चा कंपनी उठायेगी और साथ ही हर महीने एक हज़ार स्कॉलरशिप भी उसे मिलेगी ।”

हाथ जोड़ते खुशीसे उसने आँखें बंद कर दी और उसी क्षण उसे हाथ जोड़े उसके आभार मानतीं वह लड़की याद आयी ।


प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare

आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें 🙏🙏🙏

https://pramodplanet.blogspot.com/

#pramodplanet

इमानदारी मराठी

  इमानदारी अंग अवघडून गेलंय… तीन तास गाडी चालवायची आणि त्यात हा घाटातला रस्ता… यावर एकच औषध आहे, दोन पेग मारायचे… पण मैं पीता नही ना… एसीपी ...